Manav Netra Tatha Rang Biranga Sansar Subjective Question || मानव नेत्र तथा रंग बिरंगा संसार प्रश्न और उत्तर

प्रश्न (1. प्रकाश वर्ण विक्षेपण से क्या समझते हैं? वर्णपट्ट क्या है तथा यहकितने प्रकार का होता है?  |BM, 11 A, 15 A,16A
उत्तर –  श्वेत प्रकाश की किरण को जब प्रिज्म से गुजारा जाता है तो वह अपने सात अवयवी रंगों में विभक्त हो जाती है।प्रकाश किरण का अपने सात अवयवी रंगों में विभक्त होने की घटना प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण कहलाती है तथा इस प्रकार सात रंगों की जो पट्टियाँ प्राप्त होती हैं, उसे स्पेक्ट्रम या वर्णपट्ट कहते हैं।

 


प्रश्न 2). सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?    T.Q., 18 A, 19 A
उत्तर– प्रातः समय सूर्य क्षितिज के निकट होता है। सूर्य की किरणों को हम तक पहुँचने के लिए वातावरणीय मोटी परतों से गुजर कर पहुँचना पड़ता है। नीले और कम तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का अधिकांश वहाँ उपस्थित कणों द्वारा प्रकीर्णित कर दिया जाता है। हमारी आँखों तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक तरंगदैर्घ्य का होता है। इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्यरक्ताभ प्रतीत होता है।


प्रश्न 3).   नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर–  नेत्र की समंजन क्षमता  अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता या गुण है, जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, समंजन क्षमता कहलाता है ।

 


प्रश्न 4 ). पक्ष्माभि पेशी का प्रमुख कार्य क्या है ?
उत्तर–
वे अभिनेत्र लेंस की वक्रता और उसके सम्बन्ध में फोकस दूरी को परिवर्तित करते हैं तथा विभिन्न वस्तुओं को समंजित करने में नेत्र की सहायता करते हैं


प्रश्न 5 ).  मोतियाबिन्द क्या है ? क्या मोतियाबिन्द को ठीक करना सम्भव है?
उत्तर-
मोतियाबिन्द में अभिनेत्र लेंस में झिल्ली के बढ़ जाने के फलस्वरूप नेत्रों की ज्योति कम हो जाती है । मोतियाबिन्द को शल्य चिकित्सा से ठीक करना सम्भव है।

 


प्रश्न 6 ).  किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों दिखाई देता है ?
उत्तर-
अंतरिक्ष में वायुमंडल या अन्य सूक्ष्म कण नहीं हैं । अतः सूर्य से आती प्रकाश की किरणों का प्रकीर्णन नहीं होता है । इससे अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला दिखाई देता है


प्रश्न 7 ). आकाश का रंग नीला दिखाई देता है। क्यों ? [2015A
उत्तर- 
सूर्य का प्रकाश जब वायुमंडल से होकर गुजरता है, तो उसका वायुमंडल के गैसों के अणुओं, पानी की बूंदों, धूल कणों आदि से प्रकीर्णन होता है । इनमें सबसे सूक्ष्म कण गैस के अणु होते हैं जो नीले रंग को अधिक प्रकीर्णित करते हैं । यही प्रकीर्णित प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है और इसलिए हमें आकाश नीला प्रतीत होता है ।

 


प्रश्न 8 ). निकट दृष्टि दोष के क्या कारण हैं ?
उत्तर- 
 निकट दृष्टि दोष के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं,
(1) नेत्र लेंस की फोकस दूरी कम हो या क्षमता बढ़ जाए ।
(ii) नेत्र की गोलाई बढ़ जाए या नेत्र लेंस और रेटिना के बीच की बढ़ जाता है

 


प्रश्न 9 ). मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिंदु निकट बिंदु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं ?
उत्तर-   (i)
दूर बिन्दु नेत्र से अनन्त दूरी पर होता है ।
(ii)
निकट बिन्दु नेत्र से 25 cm की दूरी पर होता है।

 


प्रश्न 10 ).  सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को क्यों नहीं देख पाते ?
उत्तर- 
सुस्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी 25 cm है । यदि कोई वस्तु सामान्य नेत्र से 25 cm से कम दूरी पर रखी हुई है तो उस वस्तु का प्रतिबिम्ब दृष्टि पटल पर स्पष्ट नहीं बन पाता जिसके कारण परिणामी प्रतिबिम्ब धुंधला-सा बनता है ।

 


प्रश्न 11 ). दो आँखों की क्या उपयोगिता है ?
उत्तर–  वस्तु को दो आँखों से देखने की उपयोगिता निम्नलिखित है :
(i)  वस्तु की दूरी का अन्दाजा ठीक-ठीक लगाया जा सकता है
(ii)  वस्तु की त्रिदिशाओं का प्रभाव ठीक से प्राप्त किया जा सकता है

(iii) दोनों आँख एक-दूसरे को सेकेण्ड के एक भाग के लिए आराम देती रहती हैं।

 


प्रश्न 12 ).  दृष्टि निर्बन्ध क्या है ?
उत्तर- 
रेटिना पर बना प्रतिबिम्ब वस्तु के हटाए जाने के 1/10 सेकेण्ड तक स्थिर रहता है । इसे दृष्टि निर्बन्ध (Persistence of Vision) कहते है |

 


प्रश्न 13 ).  निकट दृष्टि दोष तथा दूर दृष्टि दोष क्या है ? इन दोषों को किस प्रकार दूर किया जाता है ?
उत्तर– 
जब आँखों से केवल पास की वस्तु स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और दूर की वस्तु दिखाई नहीं देती है, तो इसे निकट दृष्टिदोष कहते हैं । उपयुक्त फोकस दूरी के अवतल लेंस के प्रयोग द्वारा इसे ठीक किया जा
सकता है। जब आँखों से दूर की वस्तु स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और पास की वस्तु नहीं दिखाई देती है, तो इसे दूर दृष्टिदोष कहा जाता है । उपयुक्त फोकस दूरी के उत्तल लेंस के प्रयोग द्वारा इसे ठीक किया जा सकता है ।

 


प्रश्न 14 ).  निकट दृष्टि दोष का व्यक्ति पुस्तक पढ़ते समय चश्मे को क्यों हटा देता है ?
उत्तर-
  सामान्य निकटस्थ बिन्दु 25 cm है । यदि अवतल लेंस के चश्मे से पुस्तक पढ़ें तो उसे पुस्तक को अधिक दूरी पर रखनी होगी । इसके अतिरिक्त पुस्तक का प्रतिबिम्ब रेटिना के पीछे धुंधला दिखाई देगा । इसलिए निकट दृष्टिदोष वाला व्यक्ति चश्मे को उतारकर पढना पसन्द करता है

 


प्रश्न 15 ). इंद्रधनुष क्या है ?

उत्तर-  इन्द्रधनुष वर्षा के पश्चात् आकाश में जल के सूक्ष्म कणों में दिखाई देता है। वायुमंडल में उपस्थित जल की सूक्ष्म बूंदों द्वारा सूर्य के प्रकाश के परिक्षेपण के कारण प्राप्त होता है। जल की सूक्ष्म बूंदें छोटे-छोटे प्रिज्मों की भाँति कार्य करती हैं । सूर्य के आपतित प्रकाश को ये बूंदें अपवर्तित तथा विक्षेपित करती है, तत्पश्चात इसे आंतरिक परावर्तित करती है, अंततः जल की बूँद से बाहर निकलते समय प्रकाश को पुनः अपवर्तित करती हैं और इन्द्रधनुष का निर्माण होता है।

 


प्रश्न 16 ). तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?
उत्तर–
वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं । वायुमंडल का अपवर्तनांक निरंतर बदलता रहता है । तारे का प्रकाश पृथ्वी पर पहुँचने तक अपवर्तित होता रहता है । वायुमंडल तारे के प्रकाश को अभिलंब की ओर झुका देता है, अतः तारे की आभासी स्थिति उसकी वास्तविक स्थिति से कुछ भिन्न प्रतीत होती है । क्षितिज के निकट देखने पर कोई तारा अपनी वास्तविक स्थिति से कुछ ऊँचाई पर प्रतीत होता है । तारे की यह आभासी स्थिति भी स्थायी न होकर धीरे-धीरे थोड़ी बदलती ही रहती है तथा आँखों में प्रवेश करने वाले तारों के प्रकाश की मात्रा झिलमिलाती रहती है जिसके कारण कोई तारा कभी चमकीला प्रतीत होता है तो कभी धुंधला, जो कि टिमटिमाहट का प्रभाव है ।

 


प्रश्न 17 ).  दृष्टि दोष क्या है ? यह कितने प्रकार के होते हैं तथा इसका निवारण कैसे किया जाता है ? [2016 A]
उत्तर- 
दृष्टि दोष : उम्र बढ़ने या किसी अन्य कारण से आँख अपनी समायोजन की शक्ति अंशतः खो देती है, जिससे विभिन्न दूरियों की वस्तु का प्रतिबिम्ब आँख की रेटिना पर नहीं बनता है । इससे आँख में दृष्टि दोष उत्पन्न हो जाता है। दृष्टि दोष मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं
(i) निकट दृष्टि दोष : इसका निवारण अवतल लेंस के उपयोग से होता है।

(ii) दीर्घ दृष्टि दोष : इसका निवारण उत्तल लेंस के उपयोग से होता
(iii) जरा दृष्टि दोष : इसका निवारण बाइफोकल लेंस के उपयोग से होता है।
(iv) अबिन्दुकता : इसका निवारण बेलनाकार लेंस के उपयोग से होता है।

 


प्रश्न 18 ).  शंकु तथा शलाका क्या है ?
उत्तर-
शलाका और शंकु रेटिना में उपस्थित प्रकाश संवेदी कोशिकाएँ हैं । शलाका प्रकाश की तीव्रता को नियंत्रित करते हैं, जबकि शंक्वाकार कोशिकाएँ रंग के अवबोधन को नियंत्रित करती है


प्रश्न 19 ).  व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते हैं ?
उत्तर- 
ग्रह तारों की तुलना में पृथ्वी के निकट है और इन्हें विस्तृत स्रोत की भाँति माना जा सकता है । यदि हम ग्रह को बिंदु आकार के अनेक प्रकाश स्रोतों का संग्रह मान लें तो सभी बिंदु आकार के प्रकाश स्रोतों से हमारी आँखों में प्रवेश करने वाली प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का
औसत शून्य होगा जिसके कारण ग्रहों के टिमटिमाने का प्रभाव निष्प्रभावी हो जाता है।

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