Class 10 Vdyut Dhara Ke Chumbakiye Prabhav Ka Sbjective Question|| Vidyut Dhara Ke Chumbakiye Prabhav Class 10th

प्रश्न 1.  लघु पथन से आप क्या समझते हैं ?  [2016A]
उत्तर-  किसी कारण से जब जीवित तार और उदासीन तार एक दूसरे से सट जाते हैं तो लघु पथन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है । इस परिस्थिति में प्रतिरोध शून्य हो जाता है और परिपथ में तीव्र धारा बहने लगती है । धारा के उच्च होने पर काफी ताप उत्पन्न होता है जिससे अग्नि की उत्पत्ति होने लगती है तथा परिपथ में आग लगने का भय रहता है ।

 


प्रश्न 2.  फ्लेमिंग का बामहस्त नियम लिखिए ।
उत्तर-   
फ्लेमिंग का बामहस्त नियम : अपने बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अंगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि वे एक-दूसरे पर लम्बवत् हों । यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा विद्युत धारा की दिशा प्रदर्शित करे तो अँगूठा चालक की गति की दिशा की ओर संकेत करेगा ।

 


प्रश्न 3.  विद्युत जनित्र का सिद्धान्त लिखिए ।
उत्तर-   
विद्युत जनित्र का सिद्धान्त : यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर आधारित है । जब किसी कुण्डली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो कुंडली से संबंधित चुंबकीय बल रेखाओं की संख्या में परिवर्तन होता है जिसके कारण कुण्डली में प्रेरित धारा बहने लगती है । यह यांत्रिक उर्जा को विद्युत उर्जा में परिवर्तित करता है

 


प्रश्न 4. विद्युत जनित्र का सिद्धान्त लिखिए ।
उत्तर–   
विद्युत जनित्र का सिद्धान्त : यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर आधारित है । जब किसी कुण्डली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो कुंडली से संबंधित चुंबकीय बल रेखाओं की संख्या में परिवर्तन होता है जिसके कारण कुण्डली में प्रेरित धारा बहने लगती है । यह यांत्रिक उर्जा को विद्युत उर्जा में परिवर्तित करता है

 



प्रश्न 5 .  घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर-   
परिपथ में उपयोग में आने वाले तारों पर अच्छे प्रकार का विद्युत रोधन जैसे PVC आदि का आवरण होना चाहिए ।
2. विद्युत परिपथ में फ्यूज लगाना चाहिए ।
3. अधिक शक्ति वाले साधित्रों, जैसे-एयर कंडीशनर, रेफ्रीजरेटर, जल ऊष्मक आदि का एक साथ उपयोग नहीं करना चाहिए ।

 


प्रश्न 6 .  चुंबकीय क्षेत्र के तीन स्रोतों की सूची बनाइए ।
उत्तर- 
(i) विद्युत चुंबक
(ii) एक विद्युत धारावाही चालक तार
(iii) स्थायी चुंबक
(iv) पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और
(v) एक विद्युत धारावाही परिनालिका

 


प्रश्न 7 . विद्युत आपूर्ति में लघु पथन और अतिभारण से क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-  (i) लघु पथन:
जब कभी विद्युत धारा लाने वाली तार उदासीन (Neutral Wire) या भूमि तार (Earth Wire) से जुड़ जाती है तो परिपथ से बहुत बड़ी मात्रा में विद्युत धारा बहती है और प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है । विद्युत धारा उपकरण से गुजरते हुए छोटा रास्ता अपनाती है, इसीलिए इसे लघु पथन (Short Circuiting) कहते हैं । इससे होने वाली क्षति से बचने के लिए परिपथ में फ्यूज का प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिए ।
(ii) अतिभारण (Over Loading) :
सभी जगह प्रयुक्त होने वाली विद्युत तारों की विशेष क्षमता होती है । जब कभी अनेक उपकरणों को एक साथ प्रयुक्त करके एक ही तार से अधिक मात्रा में विद्युत धारा प्राप्त की जाती है तो उस तार की निर्धारित क्षमता से अधिक काम लेने के कारण वह गर्म हो जाती है और उसके ऊपर सुरक्षा के लिए लगी प्लास्टिक पिघल जाती है जिस कारण शॉर्ट सर्किट होने का भय रहता है ।

 


प्रश्न 8 .  दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं ?
उत्तर-   
यदि दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं तो इसका अर्थ होगा कि प्रतिच्छेद बिंदु पर दिक्सूची को रखने पर उसकी सूई दो दिशाओं की ओर संकेत करेगी जो कि संभव नहीं हो सकता ।

 


प्रश्न 9 .  चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए ।
उत्तर- 
(i) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तर दिशा से निकलकर दक्षिण दिशा की ओर जाती हैं।
(ii) चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता को क्षेत्र रेखाओं के बीच निकटता से मापा जाता है । यदि रेखाएँ अधिक हैं तो चुंबकीय प्रबलता अधिक है जबकि रेखाएँ कम हैं तो चुंबकीय प्रबलता कम है ।
(iii) दो क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित नहीं करती है

 


प्रश्न 10 .  भू-संपर्क तार का क्या कार्य है ?
उत्तर-   
भू-संपर्क तार एक सुरक्षा का साधन है और विद्युत सप्लाई को किसी प्रकार प्रभावित नहीं करता । धात्विक साधित्रों का भूमि से संपर्क करने पर पृथ्वी धारा के प्रवाह के लिए लगभग शून्य प्रतिरोध का पथ प्रदान करती है और धारा हमारे शरीर से नहीं गुजरती है । हम इस गंभीर झटके से बच जाते हैं । अर्थात् भू-संपर्क तार विद्युत धारा के लिए अल्प प्रतिरो चालन-पथ प्रस्तुत करता है । लघु पथन और विद्युत शॉक से बचने के लिए यह बहुत ही आवश्यक उपयोग होने

 


प्रश्न 11 .  विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतः उपयोग होने ‘वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए ।
उत्तर-   
फ्यूज यह एक सुरक्षा की युक्ति है । सामान्यतः फ्यूज टिन अथवा ताँबे और टिन की मिश्र धातु से बना होता है । इसका उच्च प्रतिरोध एवं कम गलनांक होता है । परिपथों की लघुपथन अथवा अतिभारण से रक्षा के लिए फ्यूज महत्त्वपूर्ण सुरक्षा युक्ति है ।
(ii) भू-सम्पर्क तार :   इस तार का प्रयोग विशेषकर फ्रिज, कूलर, इस्त्री,टेबल फैन, टोस्टर आदि में किया जाता है । भू-सम्पर्क तार विद्युत धारा के लिए अल्प प्रतिरोध चालन पथ प्रस्तुत करता है । इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि साधित्र की धात्विक बॉडी में धारा का कोई क्षरण होने पर उस साधित्र का विभव भूमि के विभव के बराबर रहे एवं इसे उपयोग करने वाले व्यक्ति को तीव्र विद्युत आघात (Shock) न लगे ।

 


प्रश्न 12 .  विद्युत बल्ब में क्यों निष्क्रिय गैस भरी जाती है ?    [2015A]
उत्तर-   
विद्युत् बल्ब में टंगस्टन के पतले तार की एक छोटी ऐंठी हुई कुंडली होती है, जिसे तंतु या फिलामेंट कहते हैं । यदि फिलामेंट से हवा-माध्यम में धारा प्रवाहित कराई जाय, तो यह हवा के ऑक्सीजन से ऑक्सीकृत होकर भंगुर हो जायेगा और टूट जायेगा । इसलिये विद्युत् बल्ब के
अंदर की हवा निकालकर निष्क्रिय गैस भर दी जाती है ।


प्रश्न 13  . चालक, अचालक, अर्द्धचालक एवं अति चालक से आप क्या समझते हैं ? सोदाहरण व्याख्या करें।
उत्तर-   चालक- 
 ऐसा पदार्थ जिससे होकर विद्युत आवेश एक जगह से दूसरी जगह आसानी से चले जाते हैं, चालक कहलाता है। दूसरे शब्दों में जिन पदार्थों की विशिष्ट चालकता काफी अधिक होती है, चालक कहलाता है। चालक पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या काफी अधिक होती है। जैसे- सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, ऐल्युमिनियम, नमकीन घोल इत्यादि।
अचालक- 
 ऐसे पदार्थ जिनसे होकर विद्युत आवेश प्रवाहित नहीं हो सकते हैं, अचालक कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में ऐसा पदार्थ जिनकी विशिष्ट चालकता बहुत ही कम होती है, अचालक कहलाता है। अचालक पदार्थ में मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं। जैसे-सल्फर, काँच, रबड़, प्लास्टिक, सूखी लकड़ी आदि।

अर्द्धचालक-   पदार्थ जिनकी विशिष्टपदार्थों की विशिष्ट चालकता के बीच होती है, इन पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रानों की संख्या अल्प होती है अर्द्धचालक कहते हैं। उदाहरण: जर्मेनियम एवं सिलिकान। अर्द्धचालक का उपयोग ट्रांजिस्टर, डायोड तथा कम्प्यूटर के लिए स्मरण युक्तियों
के निर्माण में किया जाता है। अतिचालक- ऐसे पदार्थ जिनमें अतिनिम्न ताप पर (निरपेक्ष शून्य के निकट) पर बिना किसी प्रतिरोध के विद्युत का गमन होता है अति चालक कहलाते हैं तथा
यह घटना अतिचालकता कहलाती है। जैसे-शीशा, जिंक, ऐल्युमिनियम, पारा आदि।

 


प्रश्न 14  . फ्लेमिंग का नियम ?

उत्तर-  (i) फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम-  अपने वाम-हस्त के अंगूठे, तर्जनी के मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाएँ कि वे परस्पर समकोण बनाएँ। तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को निर्दिष्ट करेगी। मध्य अंगुली धारा के प्रवाह की दिशा को बताएगी और अंगूठा चालक की दिशा को प्रवाहित करेगा।

(iii) फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम-अपने दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा अंगुली तथा अंगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत् हों। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर संकेत करती है तथा अंगूठा चालक की गति को दिशा की ओर संकेत करता है तो मध्यम चालक में प्रेरित विद्युत-धारा की दिशा दर्शाती है।



 

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