shram vibhajan aur jati pratha class 10 question answer || श्रम विभाजन और जाति प्रथा प्रश्न उत्तर class 10

प्रश्न 1.  भीमराव अम्बेदकर किस विडम्बना की बात करते हैं        [20204]
अथवा, लेखक किस विडंबना की बात करते हैं ? विडंबना का स्वरूप    [M. Q. Set-IV : 2015, 2012C
उत्तर–  आधुनिक युग में भी जातिवाद का पोषण होना, इसके पोषकों की कमी नहीं होना, इस तरह की प्रथा को बढ़ावा देना, लेखक के विचार से विडंबना माना गया है।

 


प्रश्न 2 .  अम्बेदकर के अनुसार जाति-प्रथा के पोषक उसके पक्ष में क्या तर्क देते हैं? [B.M.2018, 2014A,
उत्तर- 
 जातिवाद के पक्ष में इसके पोषकों का तर्क है कि आधुनिक सभ्य समाज  ‘कार्य-कुशलता’ के लिए श्रम-विभाजन को आवश्यक मानता है और चूँकि जाति प्रथा भी श्रम-विभाजन का ही दूसरा रूप है, इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है।

 


प्रश्न 3 .  सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है? [2016A,
उत्तर-   
लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है। सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए  समरसता, भ्रातृत्व एवं स्वतंत्रता आवश्यक है।

 


प्रश्न 4  .  अम्बेडकर किस विडम्बना की बात करते हैं? विडम्बना का स्वरूप क्या है।
उत्तर –
अंबेडकर जाति प्रथा को विडम्बना मानते हैं। यह मजाक का विषय इसलिए है कि शिक्षा और सभ्यता के विकास के बावजूद भी इस प्रथा के पोषक बड़ी संख्या में हैं। इसका स्वरूप जाति विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन का भी है।

 


प्रश्न 5 .  बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर की दृष्टि में आदर्श समाज कैसा होगा?
उत्तर-   बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर की दृष्टि में आदर्श समाज
स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व पर आधारित होगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page