sst pyq 2020 dwitiya pali 48 questions
2020 की दूसरी पाली का पेपर हाथ में लेते ही एक फ़र्क़ तुरंत महसूस होता है। पहली पाली में भूगोल हावी था, यहाँ वह थोड़ा पीछे हट जाता है और इतिहास आगे आ जाता है। जिन बच्चों ने पहली पाली का पेपर देखकर अंदाज़ा लगाया था कि “भूगोल से सबसे ज़्यादा आएगा”, उनका अंदाज़ा यहाँ आधा सही निकला।
इस पेपर में कुल 48 सवाल थे और उन्हें विषय के हिसाब से अलग करने पर साफ़ तस्वीर बनती है — 17 भूगोल से, 14 इतिहास से, 11 नागरिक शास्त्र से और 6 अर्थशास्त्र से। यानी भूगोल छह सवाल कम हो गया, इतिहास पाँच बढ़ गया। दो सवाल ऐसे भी हैं जिनमें चारों विकल्प देखकर लगता है कि सवाल अधूरा है, और सही जवाब “इनमें से कोई नहीं” बैठता है।
नीचे उसी पेपर के 48 सवालों पर बना टेस्ट है। भाषा बोर्ड वाली ही रखी है, ताकि जब असली पेपर आए तो शब्द नए न लगें। हर सवाल के चार विकल्प हैं और टेस्ट खत्म होते ही स्कोर के साथ सही जवाब भी दिख जाएगा।
| कुल सवाल | 48 |
| विषय का बँटवारा | भूगोल 17, इतिहास 14, नागरिक शास्त्र 11, अर्थशास्त्र 6 |
| सुझाया समय | 12 से 14 मिनट |
| भाषा | हिंदी, बोर्ड की शब्दावली |
| खर्च | मुफ़्त, सिर्फ़ नाम लिखना है |
यहाँ से टेस्ट शुरू कीजिए
शुरू करने से पहले एक कागज़ और पेन रख लीजिए। जो सवाल अटके, उनके नंबर लिखते चलिए। टेस्ट के बाद यही नंबर आपकी रिवीज़न की सूची बनेंगे — पूरा पेपर दोबारा पढ़ने से ज़्यादा फ़ायदा उन्हीं दस-बारह सवालों को दोबारा देखने में है।
पेपर का ढाँचा: 17-14-11-6
सोशल साइंस के चार हिस्से हैं और बोर्ड हर साल इनका अनुपात थोड़ा बदलता रहता है। इस पाली में अनुपात यह था:
| विषय | सवाल | कहाँ से आए |
|---|---|---|
| भूगोल | 17 | संसाधन, उद्योग, आपदा प्रबंधन, नक्शा |
| इतिहास | 14 | यूरोप का इतिहास, राष्ट्रीय आंदोलन |
| नागरिक शास्त्र | 11 | लोकतंत्र, संविधान, पंचायत, चुनाव |
| अर्थशास्त्र | 6 | मुद्रा, बैंक, वैश्विक संस्थाएँ |
ऊपर के आँकड़े किस आधार पर बने, यह भी साफ़ रहे। नीचे हर हिस्से के सवाल नंबर दिए हैं, ताकि आप ख़ुद मिलान कर सकें:
| हिस्सा | सवाल नंबर | गिनती |
|---|---|---|
| भूगोल | 1, 2, 3, 4, 8, 17, 18, 19, 20, 28, 29, 30, 31, 32, 34, 35, 36 | 17 |
| इतिहास | 9, 10, 11, 12, 21, 22, 23, 24, 39, 41, 42, 43, 44, 45 | 14 |
| नागरिक शास्त्र | 7, 13, 14, 15, 16, 25, 26, 27, 37, 38, 40 | 11 |
| अर्थशास्त्र | 5, 6, 33, 46, 47, 48 | 6 |
दो सवालों को लेकर दो राय हो सकती है — बीसवाँ (कुश्वेश्वरस्थान) और अट्ठाईसवाँ (बीमारू राज्य)। इन्हें भूगोल में रखा गया है क्योंकि दोनों जगह और राज्य की स्थिति से जुड़े हैं। अगर आपकी किताब इन्हें अर्थशास्त्र में रखती है तो गिनती एक-दो बदल जाएगी, पर कुल 48 वही रहेगा।
तुलना करने पर बात समझ आती है। इसी साल की पहली पाली में भूगोल से 23 सवाल आए थे, इतिहास से 9, नागरिक शास्त्र से 12 और अर्थशास्त्र से 4। दूसरी पाली में भूगोल के छह सवाल इतिहास और अर्थशास्त्र की तरफ़ खिसक गए। नागरिक शास्त्र लगभग वहीं रहा — 12 से 11 — यानी यही हिस्सा सबसे स्थिर निकला।
इसका सीधा मतलब यह है कि “पहली पाली में भूगोल ज़्यादा था, तो दूसरी में भी होगा” वाला अंदाज़ा काम नहीं करता। दोनों पालियों के पेपर अलग-अलग बनाए जाते हैं और अंदर का संतुलन भी अलग रहता है। तैयारी में किसी एक हिस्से को दाँव पर लगाना इसलिए ठीक नहीं।
एक और चीज़ ध्यान देने वाली है। 48 में से करीब 9 सवाल सीधे बिहार से जुड़े थे — पटना, दरभंगा, जमालपुर, कोसी, पंचायत, जद(यू), 1977 की सरकार, बीमारू राज्य और बिहार की अर्थव्यवस्था। यानी हर पाँचवाँ सवाल अपने ही राज्य का। बाहर के बोर्ड की किताब से पढ़ने वाले बच्चे यहीं अटकते हैं।
तीन जगह जहाँ विकल्प आपको गुमराह करते हैं
हर पेपर में दो-तीन सवाल ऐसे होते हैं जिनमें जवाब पता होने के बाद भी ग़लती हो जाती है। इस पेपर में मुझे तीन साफ़ दिखे।
1. हीराकुंड बाँध बिहार में नहीं है
पहला सवाल हीराकुंड बाँध का है और चारों विकल्प राज्यों के नाम हैं। बिहार का बच्चा “बिहार में” पढ़कर तुरंत निशान लगा देता है, क्योंकि बाँध, नदी, बाढ़ — ये शब्द यहाँ रोज़ सुनते हैं। सच यह है कि हीराकुंड ओडिशा के संबलपुर ज़िले में महानदी पर बना है। बिहार का सबसे बड़ा बाँध होने का भ्रम इसलिए बनता है क्योंकि कोसी और गंडक की बाढ़ पर हमारी किताबें ज़्यादा बोलती हैं।
2. सुंदरवन बंगाल में है, केरल में नहीं
सुंदरवन का सवाल भी ऐसा ही है। मैंग्रोव, डेल्टा, बाघ — तीनों शब्द सुनते ही केरल का ख़्याल आता है, क्योंकि बैकवाटर और मैंग्रोव वहीं ज़्यादा पढ़ाए जाते हैं। लेकिन सुंदरवन गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टा में है, यानी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के हिस्से में। भारत के सुंदरवन का बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल में आता है।
3. “इनमें से कोई नहीं” वाला जाल
चौथा सवाल द्वितीय पृथ्वी सम्मेलन का है। विकल्प हैं न्यूयॉर्क, पेरिस, मॉस्को और “इनमें से कोई नहीं”। 1992 का पृथ्वी सम्मेलन रियो डी जनेरियो में हुआ था, और रियो चारों में से किसी विकल्प में नहीं है। जवाब चौथा विकल्प है।
यहाँ एक आदत काम आती है। अगर सवाल का सीधा जवाब चारों विकल्पों में न दिखे, तो घबराना नहीं — पहले यह देखिए कि चौथा विकल्प “कोई नहीं” है या नहीं। इस पेपर में यह सिर्फ़ एक बार आया, पर 2018 और 2019 की पालियों में यह तीन-चार बार दिख चुका है।
छह सवाल जो पूरे पेपर का मिज़ाज बताते हैं
पूरे पेपर को पढ़ने के बाद छह सवाल ऐसे मिले जिनसे पता चलता है कि पेपर बनाने वाले किस चीज़ को अहम मान रहे थे। इन्हें समझ लिया तो बाकी 42 सवाल भी आसान लगने लगते हैं।
मानव अधिकार सुरक्षा अधिनियम — 1993
सातवाँ सवाल पूछता है कि भारत में मानव अधिकार सुरक्षा अधिनियम कब पारित हुआ। चारों विकल्प 1991, 1993, 1995 और 1997 हैं — यानी चारों नब्बे के दशक के। ऐसे सवाल में अंदाज़ा लगाना सबसे बड़ी ग़लती है। सही साल 1993 है। इसे यूँ याद रखिए: मानव अधिकार कानून उसी दशक में आया जब भारत में आर्थिक उदारीकरण शुरू हो चुका था, और इसी दशक में पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा भी मिला। दोनों को एक साथ याद रखने से भ्रम कम होता है।
टाटा आयरन एंड स्टील — 1907
अठारहवाँ सवाल टिस्को की स्थापना का साल पूछता है और विकल्प 1905, 1906, 1907, 1908 हैं। एक साल का फ़र्क़, चारों विकल्प एक-दूसरे से चिपके हुए। ऐसे सवाल में “करीब का साल” याद रखने से काम नहीं चलेगा, सटीक साल चाहिए। टिस्को 1907 में जमशेदपुर में शुरू हुआ, और यह भारत की पहली बड़ी इस्पात कंपनी थी।
वाष्पचालित रेल इंजन — स्टीफ़ेंसन
इक्कीसवाँ सवाल। विकल्पों में जेम्स वाट और जॉर्ज स्टीफ़ेंसन दोनों हैं। वाट ने भाप इंजन को बेहतर बनाया, लेकिन रेल इंजन पर चलाने का काम स्टीफ़ेंसन ने किया। यही फ़र्क़ सवाल का पूरा खेल है। अब्राहम डर्बी और रॉबर्ट फ़ुल्टन भी विकल्प में हैं, इसलिए जो बच्चा सिर्फ़ “भाप इंजन” याद करके आया है, वह यहाँ फँसेगा।
15वीं लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी — 10.86 प्रतिशत
सैंतीसवाँ सवाल। विकल्प 10.86, 12.20, 13 और 24 प्रतिशत हैं। तीन विकल्प एक-दूसरे के बहुत करीब हैं, इसलिए अनुमान से काम नहीं चलेगा। 15वीं लोकसभा में महिला सदस्यों का हिस्सा 10.86 प्रतिशत था। यह आँकड़ा किताब के उस हिस्से में मिलता है जहाँ चुनाव और प्रतिनिधित्व की बात होती है — अलग से रटने की ज़रूरत नहीं, बस पढ़ते समय नंबर पर नज़र रखिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ — 1925
बयालीसवाँ सवाल और विकल्प 1923, 1925, 1934, 1939। यह सवाल इसलिए दिलचस्प है कि 1923 और 1925 दोनों “संभावित” लगते हैं। सही साल 1925 है। इसी तरह के साल आपको आगे भी मिलेंगे — 1906 (मुस्लिम लीग), 1916 (लखनऊ समझौता), 1925 (आरएसएस), 1929 (पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव)। इन्हें एक साथ लिखकर याद कीजिए, अलग-अलग नहीं।
बैंकों का राष्ट्रीयकरण — 1969
अड़तालीसवाँ और आख़िरी सवाल। विकल्प 1965, 1969, 1975, 1980 हैं। 1969 में चौदह बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था, और यही साल सही है। ध्यान दीजिए कि पेपर का आख़िरी सवाल सबसे आसान नहीं, बल्कि एक तारीख़ वाला सवाल है। बोर्ड ऐसा कई बार करता है — आख़िरी सवाल पर समय कम रहता है और बच्चा जल्दबाज़ी में ग़लत विकल्प चुन लेता है।
नौ सवाल जो सीधे बिहार से जुड़े थे
अगर आप बिहार बोर्ड के बच्चे हैं तो यह हिस्सा आपके लिए सबसे ज़्यादा अंक वाला है। पेपर में बिहार से जुड़े सवाल ये थे:
- बिहार की अर्थव्यवस्था किसमें सम्पन्न मानी जाती है
- पंचायती राज का कार्यकाल कितने साल का है
- जनता दल यूनाइटेड का गठन किस साल हुआ
- 1977 में किसके नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी
- बिहार का सबसे बड़ा नगर कौन है
- कुश्वेश्वरस्थान किस ज़िले में है
- रेल वर्कशॉप कहाँ स्थित है
- किस नदी को “बिहार का शोक” कहा जाता है
- पटना नगर निगम के प्रधान को क्या कहते हैं
इनमें से तीन सवाल — जमालपुर, कुश्वेश्वरस्थान और पटना नगर निगम — ऐसे हैं जो बाहर की किताब से पढ़ने पर छूट जाते हैं। बिहार बोर्ड की अपनी किताब में ये जगहें अलग से दी गई हैं। इसलिए दो किताबें साथ पढ़ने वाले बच्चों को यहाँ फ़ायदा मिलता है, नुक़सान नहीं।
पेपर किस तरह का था: 40 याद, 8 सोच
48 सवालों को दोबारा देखने पर एक बात साफ़ होती है। करीब 40 सवाल सीधे याद पर टिके हैं — तारीख़, नाम, जगह, संस्था। इनमें सोचने का काम बस इतना है कि सही विकल्प पहचान लिया जाए।
बाकी 8 सवाल थोड़े अलग हैं। जैसे बाढ़ के समय कहाँ जाना चाहिए, कौन-सी आपदा मानव-जनित नहीं है, लोकतंत्र की उपलब्धि में क्या सबसे ज़्यादा मदद करता है, या कौन-सी फसल रबी है। इनमें आपको किताब का वाक्य याद नहीं, बल्कि समझ काम आती है।
यही बँटवारा तैयारी का तरीक़ा भी तय करता है। अगर आप 48 सवालों को एक जैसा मानकर रटेंगे, तो 40 में तो काम बन जाएगा, पर 8 में ग़लती होगी और 90 से ऊपर स्कोर मुश्किल हो जाएगा। बोर्ड में 90 प्लस लाने वाले और 80 पर अटकने वाले बच्चों के बीच का फ़र्क़ अक्सर यही आठ सवाल होते हैं।
2027 के पेपर के लिए इस पेपर से पाँच संकेत
पुराना पेपर देखने का मक़सद सिर्फ़ अभ्यास नहीं है। उसमें से अगले साल के लिए अंदाज़ा भी निकलता है। इस पेपर से पाँच बातें साफ़ हैं।
पहली, नागरिक शास्त्र का हिस्सा दोनों पालियों में लगभग एक जैसा रहा — 12 और 11। यह सबसे स्थिर हिस्सा है, इसलिए इसे सबसे पहले पक्का कीजिए। लोकतंत्र, संविधान, पंचायत, चुनाव और दल-बदल कानून — यही चारों-पाँच विषय बार-बार आते हैं।
दूसरी, बिहार से जुड़े सवाल हर साल 8 से 9 के बीच रहते हैं। ये सवाल आसान होते हैं, पर तभी जब आपने बिहार वाला हिस्सा पढ़ा हो। इन्हें छोड़कर 90 लाने की सोचना ठीक नहीं।
तीसरी, “इनमें से कोई नहीं” विकल्प पेपर में आता है। पढ़ते समय चौथा विकल्प देखने की आदत डालिए, वरना सही जवाब पता होने पर भी नंबर कट जाएगा।
चौथी, साल वाले सवालों में विकल्प एक-दूसरे से चिपके होते हैं — 1905, 1906, 1907, 1908 जैसे। ऐसे में “करीब का साल” याद रखना बेकार है। सटीक साल याद कीजिए, और चार-चार की जोड़ी में याद कीजिए।
पाँचवीं, पेपर का आख़िरी सवाल आसान नहीं होता। यह पेपर में भी तारीख़ वाला सवाल था। आख़िरी पाँच मिनट में घबराहट में विकल्प बदलने की आदत सुधार लीजिए, वरना जो सही था वह भी ग़लत हो जाएगा।
स्कोर आने के बाद: चार बैंड, चार फ़ैसले
टेस्ट खत्म होने पर स्कोर दिखेगा। उसे सिर्फ़ देखकर बंद मत कीजिए — उसी से अगले हफ़्ते का काम तय कीजिए।
| स्कोर | इसका मतलब | अगला कदम |
|---|---|---|
| 42 से 48 | तैयारी पूरी, ग़लती दुर्लभ | रटना बंद, स्पीड बढ़ाइए |
| 34 से 41 | दो अध्याय कमज़ोर हैं | ग़लत सवालों के अध्याय दोबारा पढ़िए |
| 26 से 33 | आधार बन रहा है, अभी नहीं | नोट्स से शुरू, बिहार वाले सवाल पहले |
| 25 या कम | किताब दोबारा पढ़नी है | टेस्ट रोकिए, एक हफ़्ता किताब |
एक बात साफ़ कह दूँ — स्कोर कम आने पर निराश होने की ज़रूरत नहीं। पहली बार में 30 के आसपास आना सामान्य है। जो बच्चे तीन बार यही टेस्ट देते हैं और हर बार ग़लत सवालों की सूची छोटी करते हैं, उनका स्कोर तीसरी बार में 40 के पार चला जाता है।
सात दिन का छोटा प्लान
| दिन | काम | समय |
|---|---|---|
| पहला | यह टेस्ट बिना तैयारी के दीजिए, स्कोर नोट कीजिए | 14 मिनट |
| दूसरा | ग़लत सवालों के अध्याय किताब से पढ़िए | 40 मिनट |
| तीसरा | बिहार वाले नौ सवालों के जवाब याद कीजिए | 20 मिनट |
| चौथा | तारीख़ों की सूची बनाइए — 1857 से 1995 तक | 25 मिनट |
| पाँचवाँ | यही टेस्ट दोबारा दीजिए, स्कोर तुलना कीजिए | 14 मिनट |
| छठा | 2019 की दूसरी पाली का टेस्ट दीजिए | 12 मिनट |
| सातवाँ | सिर्फ़ ग़लत सवाल दोहराइए, कुछ नया नहीं | 15 मिनट |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह टेस्ट 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिए भी काम आएगा?
हाँ, पर एक शर्त के साथ। सवाल 2020 के पेपर के हैं, इसलिए यही सवाल 2027 में नहीं आएँगे। काम आएगा इनका ढाँचा — किस विषय से कितने सवाल आते हैं, किस तरह के विकल्प दिए जाते हैं और कहाँ जाल बिछाया जाता है। पैटर्न समझने के लिए यह टेस्ट उपयोगी है, सट्टा लगाने के लिए नहीं।
इस टेस्ट के सवाल कहाँ से लिए गए हैं?
बिहार बोर्ड क्लास 10 सोशल साइंस के 2020 के मूल प्रश्नपत्र की दूसरी पाली से। सवालों का क्रम और विकल्प उसी पेपर के अनुसार रखे गए हैं, ताकि अभ्यास करते समय असली पेपर जैसा अनुभव मिले।
कितना समय लेना चाहिए?
12 से 14 मिनट। बोर्ड में 48 सवालों के लिए लगभग इतना ही समय मिलता है। पहली बार में समय देखकर न दीजिए — पहले बिना घड़ी के दीजिए ताकि पता चले कि स्वाभाविक गति क्या है। दूसरी बार घड़ी लगाइए।
मोबाइल पर चलेगा?
चलेगा। टेस्ट मोबाइल के लिए बना है और बटन उँगली से दबाने लायक बड़े हैं। हाँ, बीच में फ़ोन बंद करने से टेस्ट दोबारा शुरू करना पड़ेगा, इसलिए 14 मिनट बिना रुकावट निकाल लीजिए।
क्या टेस्ट दोबारा दिया जा सकता है?
जितनी बार चाहें। दूसरी बार में सवाल वही रहेंगे, इसलिए स्कोर बढ़ना स्वाभाविक है — यह देखना ज़रूरी है कि बढ़ोतरी याद से आई है या समझ से। तीसरी बार में सवालों का क्रम बदल जाता है, तब असली तैयारी पता चलती है।
नाम देना ज़रूरी है क्या?
सिर्फ़ नाम लिखना है, ईमेल या अकाउंट नहीं माँगा जाता। नाम सिर्फ़ रिजल्ट दिखाने के लिए है। चाहें तो कोई भी नाम लिख सकते हैं, पर अपना नाम लिखने से जब आप दोबारा टेस्ट देंगे तो पुराना स्कोर याद रखना आसान रहेगा।
क्या इसी तरह के सवाल 2021 और 2022 में भी आए?
आए, और ढाँचा लगभग वही रहा — नागरिक शास्त्र का हिस्सा स्थिर, बिहार के सवाल 8 से 9, और तारीख़ों वाले सवाल हर बार। विषय का अनुपात थोड़ा ऊपर-नीचे होता रहा, पर मिज़ाज नहीं बदला। इसलिए 2020 का यह पेपर सिर्फ़ एक साल का अभ्यास नहीं, पूरी सीरीज़ की कुंजी है।
इसी सीरीज़ की अगली कड़ियाँ
अगर यह टेस्ट पूरा कर लिया है तो अगला काम इन तीन पेपर से जारी रखिए। क्रम मायने रखता है — पहले उसी साल की दूसरी पाली, फिर पिछला साल, फिर अगले साल का अंदाज़ा।
- SST PYQ 2020 प्रथम पाली — 48 सवाल, 23 भूगोल के
- SST PYQ 2019 द्वितीय पाली — 40 सवाल, जहाँ विकल्प धोखा देते हैं
- Bihar Board Class 10 Social Science Objective Question 2027 — 50 सवालों का टेस्ट
- Bihar Board Class 10 Online Test 2027 — रोज़ 30 मिनट का 30 दिन प्लान
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आख़िरी बात
पुराने पेपर का सबसे बड़ा फ़ायदा यह नहीं कि उनमें से सवाल दोबारा आएँगे। फ़ायदा यह है कि आपको पता चल जाता है कि बोर्ड किस तरह सोचता है — कहाँ सीधा सवाल पूछता है, कहाँ विकल्प में जाल रखता है, और कहाँ बिहार की अपनी किताब से पूछता है। यह टेस्ट उसी समझ के लिए है।
टेस्ट देने के बाद एक काम ज़रूर कीजिए: जो सवाल ग़लत हुए, उन्हें कॉपी में लिखिए और अगले दिन बिना देखे दोबारा कीजिए। यही छोटी आदत 30 से 40 के बीच का फ़ासला पाटती है।
यह टेस्ट आशु सर द्वारा तैयार किया गया है। सवाल बिहार बोर्ड के 2020 के मूल प्रश्नपत्र से लिए गए हैं और उत्तर बोर्ड के आधिकारिक मानकों के अनुसार दिए गए हैं। किसी सवाल पर आपकी किताब का शब्द अलग हो तो किताब को प्राथमिकता दीजिए — बोर्ड की कुंजी भी उसी से बनती है।
क्लास 10 · फ्री स्टडी मटेरियल
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