sst pyq 39 questions online test
सामाजिक विज्ञान में नंबर कम इसलिए आते हैं क्योंकि बच्चा पढ़ता ज़्यादा है और लिखता कम। किताब के पन्ने पलटते-पलटते लगता है कि सब याद है, पर सवाल सामने आते ही दो विकल्प आपस में उलझ जाते हैं और फिर अंदाज़े से एक पर टिक जाते हैं। यही उलझन तोड़ने का सबसे सीधा तरीका है — पुराने सवालों को किताब बंद करके हल करना।
नीचे 39 सवालों का एक टेस्ट रखा है। इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र — चारों हिस्सों से सवाल आए हैं। सवाल बोर्ड के पुराने पेपरों के ढाँचे पर बने हैं, इसलिए टेस्ट देते समय आपको यह भी पता चलेगा कि असली पेपर में सवाल किस भाषा में घुमाकर पूछे जाते हैं।
एक बात पहले ही साफ कर दें। यह टेस्ट आपको डराने के लिए नहीं है। इसका काम बस इतना है कि आपकी असली तैयारी आपके सामने आ जाए। जो सवाल गलत होंगे, वही आपकी अगले हफ़्ते की पढ़ाई की सूची बनेंगे।
SST PYQ वाला यह टेस्ट क्या नापता है
ज़्यादातर बच्चे सामाजिक विज्ञान को रटने वाला विषय मान लेते हैं। सच यह है कि इसमें रटने की ज़रूरत सबसे कम है और समझने की सबसे ज़्यादा। इतिहास में तारीख़ और कारण जोड़ने पड़ते हैं, भूगोल में नक्शा और कारण साथ चलते हैं, नागरिक शास्त्र में संविधान की बातें रोज़मर्रा के उदाहरण से जुड़ती हैं, और अर्थशास्त्र में एक शब्द की परिभाषा पूरे सवाल का जवाब तय कर देती है।
इस टेस्ट में आपसे यह नहीं पूछा जा रहा कि आपने कितना पढ़ा है। पूछा जा रहा है कि पढ़ा हुआ याद कितना है और सही विकल्प चुनने की आदत बनी है या नहीं। यही फ़र्क़ असली परीक्षा में नंबर बनाता है।
| कुल सवाल | 39 वस्तुनिष्ठ प्रश्न |
| विषय | सामाजिक विज्ञान (इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र) |
| स्तर | कक्षा 10, बोर्ड पैटर्न |
| भाषा | हिंदी |
| खर्च | शून्य — कोई फ़ीस नहीं, कोई लॉगिन नहीं |
यहाँ से अपना टेस्ट शुरू कीजिए
नीचे दिए टेस्ट को खोलते ही सवाल एक-एक करके आपके सामने आएंगे। जवाब चुनने के बाद आगे बढ़िए और आख़िर में सबमिट कीजिए। कागज़-पेन रख लीजिए, क्योंकि जो सवाल अटकेंगे उन्हें तुरंत लिख लेना है — याद रखने की कोशिश मत कीजिए।
टेस्ट शुरू करने से पहले तीन छोटी बातें
पहली — किताब बंद रखिए। अगर साथ में नोट्स खुले रहे तो टेस्ट का मतलब ही नहीं रह जाएगा। आपको अपनी असली याद जाँचनी है, अपनी खोजी आदत नहीं।
दूसरी — एक बार में पूरा कीजिए। दस सवाल करके बीच में उठ जाना सबसे बड़ी गलती है। टेस्ट पूरा होने पर ही पता चलता है कि आख़िरी सवालों में आपकी पकड़ कैसी है। बोर्ड में भी आख़िरी सवालों के नंबर ही अक्सर छूटते हैं।
तीसरी — गलती पर शर्म मत कीजिए। अभी गलती करना मुफ़्त है। मार्च में वही गलती महँगी पड़ेगी। जो बच्चे अभी अपने गलत जवाबों को ईमानदारी से गिनते हैं, वही बाद में कम गलती करते हैं।
39 सवालों में चारों हिस्सों का सच
सामाजिक विज्ञान का पेपर चार हिस्सों में बँटा रहता है, और हर हिस्से की माँग अलग है। एक ही तरीका चारों में लगाना सबसे बड़ी भूल है।
इतिहास में सवाल अक्सर घटना, कारण और असर के इर्द-गिर्द घूमते हैं। यहाँ सबसे ज़्यादा गलती इसलिए होती है क्योंकि बच्चे दो आंदोलनों के नाम, दो साल और दो नेताओं को आपस में मिला देते हैं। इस हिस्से में जीत उन्हीं की होती है जो घटनाओं को सिलसिले में याद करते हैं, अलग-अलग टुकड़ों में नहीं।
भूगोल में नक्शा और कारण दोनों साथ आते हैं। “क्यों” वाले सवाल यहाँ सबसे ज़्यादा आते हैं — कोई नदी क्यों उस तरफ़ बहती है, कोई फ़सल कहाँ होती है, कोई उद्योग कहाँ लगता है। जो बच्चा सिर्फ़ नाम रटता है और कारण नहीं समझता, वह यहाँ विकल्पों में फँसता है।
नागरिक शास्त्र में संविधान, अधिकार, चुनाव और सरकार की बातें आती हैं। इन सवालों में शब्द बहुत करीब-कराबी लगते हैं — जैसे अधिकार और कर्तव्य, या राज्य और केंद्र की सूची। यहाँ पढ़ने की गति धीमी रखनी पड़ती है, वरना एक शब्द पूरा जवाब बदल देता है।
अर्थशास्त्र में विकास, क्षेत्रक, मुद्रा, बैंक और वैश्वीकरण जैसे विषय आते हैं। इस हिस्से के सवाल छोटे लगते हैं, पर परिभाषा की एक शब्द की गड़बड़ी पूरा नंबर ले डूबती है।
गलतियों की डायरी — सबसे काम की आदत
टेस्ट देने के बाद ज़्यादातर बच्चे स्कोर देखकर आगे बढ़ जाते हैं। असली फ़ायदा यहीं छूट जाता है। एक छोटी कॉपी लीजिए और उसमें तीन कॉलम बनाइए — सवाल, मेरा जवाब, सही जवाब। फिर नीचे एक लाइन में लिखिए कि गलती किस वजह से हुई।
वजह हमेशा “नहीं आता था” नहीं होती। अक्सर वजह होती है — सवाल ठीक से नहीं पढ़ा, दो विकल्पों में उलझ गया, या नाम याद था पर साल नहीं। इन तीनों का इलाज अलग है। पहले का इलाज है धीरे पढ़ना, दूसरे का इलाज है कॉन्सेप्ट साफ़ करना, और तीसरे का इलाज है तारीख़ों को सिलसिले में दोहराना।
हफ़्ते में एक बार इस कॉपी को खोलिए। सिर्फ़ वही सवाल दोबारा कीजिए जो गलत हुए थे। जो सवाल दूसरी बार भी गलत हों, वही आपके असली कमज़ोर चैप्टर हैं। बाकी सब शोर है।
रिजल्ट आने के बाद के 15 मिनट
स्कोर देखकर भावना में बहना आसान है — या तो बहुत खुश हो जाना, या यह सोचकर छोड़ देना कि “मेरा तो कुछ नहीं होगा”। दोनों से नुकसान है। इन 15 मिनटों में सिर्फ़ तीन काम कीजिए।
- हिस्सेवार गलतियाँ गिनिए। चारों विषयों में कितने-कितने सवाल गलत हुए, यह लिख लीजिए। जिस हिस्से में सबसे ज़्यादा गलती है, अगले तीन दिन उसी को पहले पढ़िए।
- छोड़े गए सवाल अलग गिनिए। गलत और छोड़ा हुआ, दोनों एक नहीं हैं। छोड़े गए सवाल बताते हैं कि आप उस चैप्टर से डरते हैं।
- एक चैप्टर चुनिए। पूरा सिलेबस दोबारा पढ़ने की सोच मत बनाइए। सिर्फ़ एक चैप्टर चुनिए और उसे आज ही दोबारा पढ़िए। छोटा फ़ैसला टिकता है, बड़ा फ़ैसला टलता है।
PYQ सिर्फ़ पुराना पेपर नहीं, एक पैटर्न है
बोर्ड हर साल नया पेपर बनाता है, पर सवालों का ढाँचा बहुत ज़्यादा नहीं बदलता। पुराने सवालों को देखकर आप यह समझ सकते हैं कि किस चैप्टर से किस तरह का सवाल बनता है। यही कारण है कि जो बच्चे सिर्फ़ किताब पढ़ते हैं और पुराने सवाल नहीं देखते, उनके नंबर उनकी मेहनत से कम आते हैं।
पुराने सवालों का फ़ायदा उठाने का तरीका यह नहीं है कि जवाब याद कर लिए जाएँ। तरीका यह है कि सवाल पढ़कर अंदाज़ा लगाया जाए कि इस चैप्टर से अगली बार क्या पूछा जा सकता है। जो बच्चा यह करने लगता है, वह पेपर में नए सवाल देखकर भी नहीं घबराता।
इसी वजह से इस टেস्ट को बार-बार देने की आदत डालिए। पहली बार स्कोर कम आए तो कोई बात नहीं। दूसरी बार वही टेस्ट दीजिए और देखिए कि गलतियाँ घटीं या सिर्फ़ बदल गईं। घटना ज़रूरी है, बदलना नहीं।
इसी तैयारी के कुछ और ज़रूरी पेज
अगर आप बोर्ड की तैयारी को सिलसिले में करना चाहते हैं तो इन पेजों को भी एक बार देख लीजिए। ये सब मुफ़्त हैं और इसी सिलसिले की कड़ियाँ हैं।
- Social Science PYQ Class 10 — 42 सवालों का दूसरा सेट
- सामाजिक विज्ञान ऑनलाइन टेस्ट BSEB 2027
- बिहार बोर्ड क्लास 10 — रोज़ 30 मिनट का 30 दिन प्लान
- Class 10th Science Online Test 2027
- बिहार बोर्ड 10th गणित अध्याय 1 — वास्तविक संख्याएँ
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह टेस्ट बिल्कुल मुफ़्त है?
हाँ। न कोई फ़ीस, न कोई रजिस्ट्रेशन। पेज खोलिए, टेस्ट दीजिए और स्कोर देखिए।
क्या इसे मोबाइल पर दे सकते हैं?
हाँ, टेस्ट मोबाइल और कंप्यूटर दोनों पर चलता है। मोबाइल पर देते समय बस इतना ध्यान रखिए कि नेटवर्क ठीक हो, वरना बीच में सवाल दोबारा खुल सकते हैं।
कितने सवाल सही होने चाहिए?
यह आपकी तैयारी पर निर्भर है। शुरुआत में 39 में से 20-22 सही होना भी ठीक है। असली लक्ष्य यह है कि दूसरी बार वही टेस्ट देने पर गलतियाँ कम हों।
क्या यह टेस्ट 2027 की परीक्षा के लिए काम आएगा?
हाँ। पुराने सवालों का ढाँचा हर साल दोहराया जाता है, इसलिए यह टेस्ट आगे की परीक्षा में भी काम आएगा। बस सिलेबस में हुए बदलाव अपनी किताब से एक बार मिला लीजिए।
टेस्ट के बाद आगे क्या करें?
गलत सवालों की सूची बनाइए और उन्हीं चैप्टरों को अगले तीन दिन में दोबारा पढ़िए। पूरा सिलेबस दोहराने की जल्दी मत कीजिए — पहले कमज़ोर हिस्सा मज़बूत कीजिए।
आख़िरी बात
सामाजिक विज्ञान वह विषय है जहाँ मेहनत जल्दी रंग लाती है, बस तरीका सही होना चाहिए। रोज़ 20-25 सवाल, हफ़्ते में एक पूरा टेस्ट, और गलतियों की एक कॉपी — इतना करने वाला बच्चा दो महीने में खुद फ़र्क़ देख लेता है।
तो अब स्क्रॉल करके ऊपर जाइए, टेस्ट दीजिए और अपना स्कोर देखिए। जो सवाल गलत हों, उन्हें नीचे कमेंट में लिख दीजिए — हम उन्हीं चैप्टरों पर अलग टेस्ट बनाएँगे।
क्लास 10 · फ्री स्टडी मटेरियल
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