sst pyq 2019 pratham pali 40 questions
2019 की प्रथम पाली का सोशल साइंस पेपर आज भी उन बच्चों के बीच चर्चा में आता है जिन्होंने उसे दिया था। चर्चा की वजह यह नहीं है कि सवाल किताब से बाहर के थे। सवाल किताब के अंदर से ही थे — पर पूछने का तरीका ऐसा था कि पहली नज़र में लगे कि आसान है, और दूसरी बार पढ़ते ही पता चले कि विकल्प में एक शब्द ने पूरा जवाब पलट दिया।
ऐसे पेपर का सबसे बड़ा नुकसान यह नहीं होता कि बच्चा कुछ नहीं जानता। नुकसान यह होता है कि बच्चा जानते हुए भी गलत विकल्प भर आता है। बाद में किताब खोलकर देखता है तो लगता है कि सवाल ही उलझा हुआ था। पर नंबर उसी एक गोली पर कट जाता है।
नीचे उसी पाली के ढाँचे पर बना चालीस सवालों का टेस्ट है। चारों हिस्से इसमें हैं — इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र। सवाल बोर्ड की भाषा में हैं, इसलिए जब आप इसे देंगे तो सिर्फ़ नंबर नहीं मिलेंगे; यह भी पता चलेगा कि असली पेपर में आप किस तरह के सवाल पर रुकते हैं।
पेपर आसान दिखता है, जब तक विकल्प न पढ़ो
वस्तुनिष्ठ पेपर में सबसे बड़ा जाल सवाल नहीं होता, विकल्प होते हैं। चारों विकल्प पढ़ने में सही लगते हैं, क्योंकि उनमें से तीन किसी न किसी पाठ से उठाए गए हैं। जो बच्चा सवाल पढ़कर पहला विकल्प देखता है और उसे जाना-पहचाना पाता है, वह वहीं रुक जाता है। बाकी तीन विकल्प उसने पढ़े ही नहीं।
दूसरी दिक्कत तारीख़ों की है। सोशल साइंस में साल, संधि के नाम, आंदोलन की शुरुआत — ये चीज़ें एक-दूसरे के बहुत क़रीब बैठती हैं। 1919 और 1929, प्रथम और द्वितीय, स्थायी बंदोबस्त और रैयतवाड़ी। जब विकल्प में दोनों मौजूद हों, तो जल्दबाज़ी में गलत वाला भर जाता है।
तीसरी दिक्कत भाषा की है। “केवल”, “सदैव”, “सभी” — ये शब्द विकल्प को ग़लत बनाने का सबसे आसान तरीका हैं। उस पाली के पेपर में भी कुछ सवाल इसी तरह घुमाए गए थे। जिसने विकल्प को पूरा पढ़ा, वह बच गया; जिसने आधा पढ़कर निशान लगा दिया, वह फँस गया।
पाँच तरह के सवाल, और हर एक का तोड़
चालीस सवालों को अगर पाँच ढाँचों में बाँट दें, तो डर कम हो जाता है। हर ढाँचे का एक तय तरीका है, और उसी तरीके से समय भी बचता है।
| सवाल का ढाँचा | कैसे पहचानें | तोड़ | समय |
|---|---|---|---|
| सीधा तथ्य | किसने, कब, कहाँ | जवाब याद है तो तुरंत भरो, नहीं तो छोड़कर आगे बढ़ो | 15 सेकंड |
| कथन वाला | “कौन-सा कथन सही है” | दोनों कथनों पर अलग-अलग सही/गलत का निशान लगाओ, फिर विकल्प देखो | 30 सेकंड |
| मिलान | सूची-I और सूची-II | जो जोड़ी पक्की है उसे पहले बाँधो, बाकी खुद छँट जाएँगी | 25 सेकंड |
| नकारात्मक | “सही नहीं है” | आख़िरी शब्द पर उँगली रखो, फिर तीन सही विकल्प काटो | 20 सेकंड |
| आँकड़ा वाला | प्रतिशत, दशक, जिला | ये बिहार वाले पाठ से आते हैं; यहाँ अंदाज़ा नहीं, रटी हुई संख्या काम करती है | 25 सेकंड |
तालिका में जो समय लिखा है, वह कम से कम है — इससे तेज़ भागना ज़रूरी नहीं। असली फ़ायदा यह है कि जब आपको पता हो कि सवाल किस ढाँचे का है, तो दिमाग़ सवाल पढ़ते ही तरीका चुन लेता है। पहले तरीका ढूँढ़ने में जो बीस सेकंड जाते हैं, वहीं बच जाते हैं।
टेस्ट देने से पहले तीन बातें
यह टेस्ट उस तरह दीजिए जैसे परीक्षा में बैठते हैं। तीन चीज़ें पहले तय कर लीजिए, वरना स्कोर से पता नहीं चलेगा कि दिक्कत कहाँ है।
- आठ मिनट का टाइमर लगा लीजिए। चालीस सवाल, आठ मिनट — यानी एक सवाल पर बारह सेकंड। असली OMR में भी रफ़्तार इसी के आसपास रहती है।
- किताब, नोट्स और मोबाइल दूर रख दीजिए। खुली किताब के साथ दिया गया टेस्ट सिर्फ़ पढ़ाई है, जाँच नहीं।
- जिस सवाल में दुविधा हो, उसे छोड़कर आगे बढ़िए। आख़िर में लौटिए। पहले दौर में अटकना ही सबसे ज़्यादा नंबर खाता है।
टेस्ट की जानकारी: कुल सवाल — 40 | पूरा नंबर — 40 | सुझाया समय — 8 मिनट | हर सही जवाब पर 1 नंबर, गलत पर कोई कटौती नहीं। नीचे टेस्ट शुरू होते ही सवाल एक-एक करके आएँगे और आख़िर में पूरा रिजल्ट मिल जाएगा।
यहाँ से टेस्ट शुरू कीजिए
सवाल 2019 की प्रथम पाली के पेपर के ढाँचे पर हैं। भाषा वही है जो बोर्ड के प्रश्नपत्र में मिलती है — इसलिए इसे सिर्फ़ नंबरों के लिए मत दीजिए, यह भी देखिए कि कौन-सा सवाल आपको दो बार पढ़ने पर मजबूर करता है। वही आपकी असली कमज़ोरी है।
स्कोर आने के बाद — तीन बैंड, तीन रास्ते
रिजल्ट देखकर सिर्फ़ यह मत सोचिए कि अच्छा आया या बुरा। स्कोर को तीन हिस्सों में बाँटिए, क्योंकि हर हिस्से का इलाज अलग है।
34 से 40 के बीच
आपका बेस मज़बूत है। अब ज़रूरत रटने की नहीं, ग़लतियों की छँटाई की है। जिन दो-तीन सवालों में फँसे, उनके पाठ खोलकर दोबारा पढ़िए और अगले दिन वही टेस्ट फिर दीजिए। अगर दूसरी बार भी उसी जगह ग़लती हो, तो समझिए वहाँ आपने समझा नहीं, रटा था।
25 से 33 के बीच
यहाँ सबसे ज़्यादा बच्चे होते हैं, और यहीं सबसे ज़्यादा नंबर बचाए जा सकते हैं। इस बैंड में ग़लती ज्ञान की कमी से कम, जल्दबाज़ी से ज़्यादा होती है। पहले उन सवालों की सूची बनाइए जिनमें आपको जवाब पता था पर विकल्प ग़लत भरा। अगली बार टेस्ट देते समय सिर्फ़ उन्हीं सवालों पर दो सेकंड ज़्यादा रुकिए।
24 से नीचे
घबराने की बात नहीं, पर यहाँ काम बुनियादी है। पहले पाठ्यक्रम के वे चार-पाँच पाठ पढ़िए जिनसे सबसे ज़्यादा सवाल बनते हैं — राष्ट्रीय आंदोलन, संसाधन, संविधान, अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक। रटने से पहले एक बार समझिए। जिस दिन पाठ समझ में आ जाएगा, उस दिन वस्तुनिष्ठ सवाल अपने आप आसान लगने लगेंगे।
वह गलती जो सबसे महँगी पड़ती है
उस पाली में सबसे ज़्यादा नंबर इस एक आदत ने काटे — विकल्प पढ़ने की जल्दी। यह गलती इसलिए महँगी है क्योंकि इसे बच्चा अपनी गलती नहीं मानता। उसे लगता है कि उसने सही भरा था और उत्तर-कुंजी में ग़लती है।
इसका इलाज एक छोटा नियम है। हर सवाल में चारों विकल्प पढ़े जाएँगे, चाहे पहला विकल्प कितना भी सही लगे। पढ़ते समय हाथ से काटने का काम कीजिए — जो विकल्प साफ़ ग़लत है, उसे काट दीजिए। तीन कट जाएँ तो चौथा अपने आप बच जाता है। और अगर दो बचे, तो उन दोनों के बीच का अंतर ढूँढ़िए, पूरा विकल्प दोबारा मत पढ़िए।
दूसरा नियम — “सभी”, “केवल”, “सदैव”, “कभी नहीं” जैसे शब्दों पर निशान लगाइए। इतिहास और नागरिक शास्त्र में ये शब्द अक्सर ग़लत विकल्प की पहचान होते हैं, क्योंकि कोई भी व्यवस्था इतनी सफ़ेद-काली नहीं होती। पर सावधान रहिए — कुछ जगह यही शब्द सही विकल्प में भी आते हैं। इसलिए निशान लगाकर सोचिए, आँख मूँदकर काटिए मत।
2019 के सवाल आज क्यों पढ़े जाएँ
बोर्ड का पाठ्यक्रम तेज़ी से नहीं बदलता। अध्याय बढ़ते-घटते हैं, पर तारीख़ें, संधियाँ, आंदोलन, संवैधानिक प्रावधान और बिहार के आँकड़े वही रहते हैं। इसलिए पुराने पेपर के सवाल दोहराए जाते हैं — शायद शब्द बदल जाए, विकल्प घूम जाएँ, पर सवाल वही रहता है।
पिछले सालों के पेपर साथ रखकर देखिए, कुछ सवाल हर साल लौटते हैं। जो बच्चा सिर्फ़ गाइड पढ़ता है, वह इन सवालों को पहचान नहीं पाता। जो बच्चा पिछले पेपर हल करता है, वह सवाल देखते ही समझ जाता है कि यहाँ बोर्ड क्या पूछना चाहता है। यही अंतर है — जानकारी और पहचान का।
एक और फ़ायदा है। पुराने पेपर से पता चलता है कि कौन-सा पाठ भारी है और कौन-सा हल्का। जब आप चार-पाँच पेपर हल कर लेते हैं, तो आपका अपना अंदाज़ा बन जाता है कि कहाँ मेहनत ज़्यादा लगानी है। यह अंदाज़ा किसी गाइड से नहीं मिलता।
अगले सात दिन का छोटा प्लान
स्कोर आने के बाद सबसे बड़ी गलती यह होती है कि बच्चा उसी दिन दो घंटे पढ़ लेता है और फिर हफ़्ते भर किताब नहीं उठाता। रोज़ तीस मिनट ज़्यादा काम के हैं।
| दिन | काम | समय |
|---|---|---|
| पहला | इस टेस्ट की ग़लतियाँ खोलकर देखिए, हर ग़लती के आगे कारण लिखिए | 30 मिनट |
| दूसरा | इतिहास के दो पाठ — सिर्फ़ तारीख़ें और नाम | 30 मिनट |
| तीसरा | भूगोल के दो पाठ — संसाधन और उद्योग | 30 मिनट |
| चौथा | यही टेस्ट दोबारा दीजिए, स्कोर लिखकर रखिए | 10 मिनट |
| पाँचवाँ | नागरिक शास्त्र — संविधान और लोकतंत्र वाले पाठ | 30 मिनट |
| छठा | अर्थशास्त्र — क्षेत्रक, बैंक, वैश्वीकरण | 30 मिनट |
| सातवाँ | इसी सिलसिले का अगला पेपर हल कीजिए, समय देखकर | 10 मिनट |
सात दिन में कुल तीन-चार घंटे का काम है। पर यह काम बिखरा हुआ नहीं है — हर दिन का एक हिस्सा तय है, और हर हिस्सा पेपर से जुड़ा है। यही तरीका आख़िरी महीने में सबसे ज़्यादा काम आता है।
बिहार वाले सवाल, जो सबसे ज़्यादा छूटते हैं
सोशल साइंस की किताब में कुछ पाठ सीधे बिहार पर हैं — बिहार का भूगोल, बिहार में उद्योग, आपदा और प्रबंधन। बच्चे इन्हें अक्सर हल्का समझकर छोड़ देते हैं, क्योंकि लगता है कि बोर्ड में सामान्य प्रश्न ही आएँगे। पर पेपर में इन्हीं पाठों से तीन-चार सवाल सीधे आ जाते हैं, और वे सबसे आसान होते हैं — बस पढ़े हुए होने चाहिए।
इन सवालों की पहचान आसान है। इनमें प्रतिशत पूछा जाता है, जिले का नाम पूछा जाता है, या यह पूछा जाता है कि कौन-सी नदी कहाँ से निकलती है। ऐसे सवाल में अंदाज़ा लगाना बेकार है। यहाँ वही काम करता है जो टेस्ट से पहले किया जाए — पाठ के आँकड़ों की एक छोटी सूची अपनी कॉपी में लिख लेना।
एक तरीका यह भी है। पाठ पढ़ते समय हर आँकड़े के आगे सवाल का निशान लगाइए। जैसे — वन क्षेत्र का प्रतिशत, प्रति व्यक्ति आय, सिंचाई का हिस्सा, साक्षरता। हफ़्ते के आख़िर में सिर्फ़ ये निशान दोहरा लीजिए। बीस मिनट का यह काम चार-पाँच सवाल बचा देता है, और चार-पाँच सवाल बोर्ड में पूरा ग्रेड बदल देते हैं।
यही बात नागरिक शास्त्र पर भी लगती है। संविधान के अनुच्छेद, सूचियाँ और संशोधन — ये भी वही रटने वाले हिस्से हैं जिन्हें बच्चे आख़िर तक टालते हैं। इन्हें टेस्ट के साथ जोड़कर देखिए, तो याद रह जाता है क्योंकि ग़लती का झटका लगता है। सिर्फ़ पढ़ने से याद नहीं रहता, टेस्ट से रहता है।
इसी सिलसिले के कुछ और पेज
अगर इस पेपर के बाद आपको और अभ्यास चाहिए, तो नीचे वाले पेज क्रम से कीजिए। हर पेपर का ढाँचा थोड़ा अलग है, इसलिए एक ही तरह के सवालों पर अटकना बंद हो जाता है।
- SST PYQ 2018 द्वितीय पाली — 40 सवालों का टेस्ट
- SST PYQ Class 10 — 39 सवालों का फ्री टेस्ट
- Social Science PYQ Class 10 — 42 में से 35 सही करके दिखाओ
- Bihar Board Class 10 Social Science Objective Question 2027 — 50 PYQ
- Bihar Board Class 10 Online Test 2027 — रोज़ 30 मिनट का 30 दिन प्लान
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस टेस्ट के सवाल कहाँ से लिए गए हैं?
2019 की प्रथम पाली के प्रश्नपत्र के ढाँचे पर, बोर्ड के पाठ्यक्रम के अंदर से। भाषा और विकल्पों का तरीका वही रखा गया है ताकि अभ्यास के समय आपको असली पेपर जैसा ही महसूस हो।
चालीस सवालों के लिए कितना समय लेना चाहिए?
आठ मिनट। पहली बार में यह कम लगेगा, पर असली OMR में रफ़्तार इसी के आसपास रहती है। शुरू में समय ज़्यादा लगे तो घबराइए मत — तीसरे-चौथे टेस्ट तक गति अपने आप बन जाती है।
क्या यह टेस्ट दोबारा दिया जा सकता है?
हाँ। दोबारा देने पर स्कोर से यह पता चलता है कि आपने ग़लतियाँ सुधारीं या वही ग़लती दोहराई। सिर्फ़ पहला स्कोर देखकर रुकना ठीक नहीं, क्योंकि असली सुधार दूसरे प्रयास में दिखता है।
मोबाइल पर भी चलेगा?
हाँ, बिना कोई ऐप डाउनलोड किए। टेस्ट ब्राउज़र में ही खुलता है और रिजल्ट भी वहीं दिखता है। हाँ, एक सलाह — अगर घर में लैपटॉप या कंप्यूटर है तो उसी पर दीजिए, क्योंकि सवाल पढ़ने में आँख कम थकती है।
क्या यह 2027 की परीक्षा के लिए भी उपयोगी है?
हाँ। पाठ्यक्रम का ढाँचा वही है और सवालों का तरीका भी वही रहता है। पुराने साल के पेपर इसलिए काम आते हैं क्योंकि उनसे पता चलता है कि बोर्ड किस तरह पूछता है, और यह समझ किसी भी साल के पेपर में काम आती है।
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आख़िरी बात
टेस्ट देने के बाद जो स्कोर आए, उसे अपनी पहचान मत बनाइए। वह सिर्फ़ एक तस्वीर है उस दिन की। असली काम उसके बाद शुरू होता है — ग़लतियों को देखना, उनका कारण ढूँढ़ना, और उसी सवाल पर अगली बार न रुकना।
2019 की प्रथम पाली का पेपर इसलिए याद रखा जाता है क्योंकि उसमें सवाल आसान थे और विकल्प कठिन। जो बच्चा विकल्प पढ़ना सीख गया, वह उस पाली से निकल आया। आपके पास भी वही मौक़ा है — बस चालीस सवाल और आठ मिनट।
क्लास 10 · फ्री स्टडी मटेरियल
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